जन सेवा न कर सकने वाला शासक
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इन्द्रियों का संयम सब के लिए अपेक्षित है,
चाहे वह शासक हो या शास्ता |
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शासक यदि ज्यादा असंयमी हो तो
वह राज्य के संचालन में कितना सक्षम हो सकेगा ?
वह जनता की कितनी सेवा कर सकेगा ?
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जन सेवा न कर सकने वाला शासक बकरी के गले के स्तन की तरह बेकार होता है |
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कर्तव्यबोध हर व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण होता है |
कर्तव्य, अकर्तव्य को नहीं जानने वाले का कभी भी अनिष्ट हो सकता है |
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अतः हम अपने दायित्व बोध का भान करते हुए
इन्द्रिय संयम के अभ्यास को वर्धमान कर भोगासक्ति से बचें |
- परमश्रद्धेय आचार्यश्री महाश्रमणजी
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इन्द्रियों का संयम सब के लिए अपेक्षित है,
चाहे वह शासक हो या शास्ता |
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शासक यदि ज्यादा असंयमी हो तो
वह राज्य के संचालन में कितना सक्षम हो सकेगा ?
वह जनता की कितनी सेवा कर सकेगा ?
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जन सेवा न कर सकने वाला शासक बकरी के गले के स्तन की तरह बेकार होता है |
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कर्तव्यबोध हर व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण होता है |
कर्तव्य, अकर्तव्य को नहीं जानने वाले का कभी भी अनिष्ट हो सकता है |
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अतः हम अपने दायित्व बोध का भान करते हुए
इन्द्रिय संयम के अभ्यास को वर्धमान कर भोगासक्ति से बचें |
- परमश्रद्धेय आचार्यश्री महाश्रमणजी
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