अध्यात्म निष्ठा के प्रतीक,
अध्यात्म के मणिदीप तथा
वाणी के अल्प प्रयोग में बहुत कुछ कह देने की क्षमता धारण करने वाले
अविचल धृतिधर परमश्रद्धेय आचार्यश्री महाश्रमणजी का
नव-वर्ष मंगल सन्देश --
सन २०१६ प्रारम्भ हो गया है और उसके लिए
३ चीजें आपको बता रहे हैं :-
१. आपको मंगलपाठ सुनने का प्रयास करना है |
थोड़ी देर में |
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२. इस वर्ष आपको जाप क्या करना है,
जाप भी सूर्योदय के आसपास हो,
इसकी एडवाइज दे रहे हैं |
प्रतिदिन २१ बार शांत बैठकर -
चइत्ता भारहं वासं, चक्कवट्टी महिड्ढिओ,
संती संतिकरे लोए, पत्तो गइमणुत्तरं ||
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३.संकल्प - इस वर्ष में गुस्सा नहीं करना,
खासकर शब्दों में व् शरीर में |
मन में भी न आये तो अच्छा है,
पर मन में आ गया हो तो
किसी को गाली, थप्पड़ आदि न देना |
यदि ऐसा भी हो गया तो
अगले दिन नमक नहीं खाएँ |
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