Tuesday, January 12, 2016

जन सेवा न कर सकने वाला शासक

जन सेवा न कर सकने वाला शासक 
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इन्द्रियों का संयम सब के लिए अपेक्षित है, 
चाहे वह शासक हो या शास्ता | 
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शासक यदि ज्यादा असंयमी हो तो 
वह राज्य के संचालन में कितना सक्षम हो सकेगा ? 
वह जनता की कितनी सेवा कर सकेगा ? 
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जन सेवा न कर सकने वाला शासक बकरी के गले के स्तन की तरह बेकार होता है |
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कर्तव्यबोध हर व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण होता है | 
कर्तव्य, अकर्तव्य को नहीं जानने वाले का कभी भी अनिष्ट हो सकता है | 
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अतः हम अपने दायित्व बोध का भान करते हुए 
इन्द्रिय संयम के अभ्यास को वर्धमान कर भोगासक्ति से बचें | 
- परमश्रद्धेय आचार्यश्री महाश्रमणजी 

Monday, January 11, 2016

नव वर्ष २०१६ का सन्देश

अध्यात्म निष्ठा के प्रतीक,
अध्यात्म के मणिदीप तथा
वाणी के अल्प प्रयोग में बहुत कुछ कह देने की क्षमता धारण करने वाले
अविचल धृतिधर परमश्रद्धेय आचार्यश्री महाश्रमणजी का
नव-वर्ष मंगल सन्देश --
सन २०१६ प्रारम्भ हो गया है और उसके लिए
३ चीजें आपको बता रहे हैं :-
१. आपको मंगलपाठ सुनने का प्रयास करना है |
थोड़ी देर में |
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२. इस वर्ष आपको जाप क्या करना है,
जाप भी सूर्योदय के आसपास हो,
इसकी एडवाइज दे रहे हैं |
प्रतिदिन २१ बार शांत बैठकर -
चइत्ता भारहं वासं, चक्कवट्टी  महिड्ढिओ,
संती संतिकरे लोए, पत्तो गइमणुत्तरं ||
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३.संकल्प - इस वर्ष में गुस्सा नहीं करना,
खासकर शब्दों में व् शरीर में |
मन में भी न आये तो अच्छा है,
पर मन में आ गया हो तो
किसी को गाली, थप्पड़ आदि न देना |
यदि ऐसा भी हो गया तो
अगले दिन नमक नहीं खाएँ |